वक्फ बिल: वक्फ संशोधन कोशा सुप्रीम कोर्ट से नही होगा खारिज, लेकिन पास करनी होगी ये इन तीन कसौटियों
Supreme Court on Waqf Amendment Law:
वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि यह कानून मुस्लिमो के साथ कि भेदभाव करता है और यह 14 व 15 वीं संविधान के तहत समानता की दी गई है अधिकार का उलंघन करता है। दूसरी ओर सरकार की तरफ से दलील दी गई है कि मुस्लिम महिलाओं के हक की रक्षा ही इस कानून में की गई है और अनुच्छेद 15 सरकार को महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान करने देता है।
Highlights
- याचिकाओं में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के उल्लंघन का मामले
- इससे बावारा सरकार कहती है कि ये कानून धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करेगा।
- वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अनेक याचिकाओ
माला दीक्षित, नई दिल्ली।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन विधेयक अब कानून बन चुका हुआ, लेकिन फिर संसद के दोनों सदनों से पारित होने के कुछ ही दिनों बाद ही इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई ,अब तक कुछ याचिकाएं दायर हो चुकी हैं में इसे संविधान का उल्लंघन बत
हालांकि सीमित खाका तो है लेकिन अगर किसी कानून की वैधता को परखने के लिए जहां सुप्रीम कोर्ट का दायरा कुछ हद तक सीमित हो सकता है।
- विधायी सक्षमता,
- संविधान का उल्लंघन, और
- भेदभावग्रस्त कानून का मनमाना।
- इन तीनों कसौटियों के आधार पर इस कानून को सुप्रीम कोर्ट से समाप्त करना यह कोई रहस्य नहीं बनता।
क्या है कानूनी सिद्धांत?
- वक्फ संशोधन कानून 2025 के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद आवश्यक होता है कि किसी कानून की समीक्षा के लिए प्रायोजित कानूनी सिद्धांत से परिचित होना चाहिए।
- इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज एस. आर. सिंह बताते हैं अभी सुप्रीम कोर्ट तीन आधारों पर कोई कानून की वैध्ता का परीक्षण करता है:
क्या हैं ये तीन कसौटियां?
क्या जिस संस्था का नाम या हरा है जिसका कानून तैयार किया गया है, में ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार था या नहीं?
- संविधान का उल्लंघन:
क्या वह कोई कानून संविधान के संविधान के किसी प्रावधान, मूल अधिकार या संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है?
2. मनमाना कानून
क्या कानून को गैर बिना उचित और में मनमाने तरीके ?
3. क्या है याचिकाओं कि गयी आधार?
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाओं में वक्फ संशोधन कानून को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यदि सुप्रीम कोर्ट इस पर विस्तृत विन्द दे तो यह धार्मिक दान की संपत्ति पर संगठित और एक स्पष्ट व्यवस्था देता है जो देशभर के विभिन्न हिस्सों में यह भी स्पष्ट करता है कि धार्मिक दान की स्थिति में से कैसे खाता खोला जा
याचिकाओं का मुख्य आधार क्या होगा।
सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसपारेंटी ट्रिब्यूनल में दाखल याचिकाओं में किया गया आरोप है कि वक्फ संशोधन कानून पर मुस्लिम समुदाय से भेदभाव हुआ है और यह धार्मिक भेदभाव कानून धार्मिक व अवैध पूजा स्वतंत्रता और समानता का उल्लंघन करता है।
वक्फ संशोधन कानून: संवैधानिक कसौटियों पर बहस और याचिकों की कस Casting
वक्फ संशोधन कानून 2025/25 पर अगर सुप्रीम कोर्ट में परखा जाने वाले तीन कानूनी आधारों पर देखें कि विशेष आधार का क्या है, उससे विधायी चुस्तता वाला है या नहीं, तो इस आधार पर तरह और इस कानून को कांत खतिथ संसद में घंटों की बहस हुई और चर्चा
दूसरा आधार – संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन. सुप्रीम कोर्ट की याचिकाओं से संविधान ने दी जिसका मुख्य आधार संविधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं का उद्योग की महामारी है इसी पर हैं केंद्रित.
याचिकाओं में क्या ?
- याचिकाओं में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत हर नागरिक से दी जा चुकी धार्मिक स्वतंत्रता और अपने धार्मिक मामलों का स्वतंत्र प्रबंधन का अधिकार रखता है।
- लेकिन इसमें सरकार उनका अब ये भी हस्तक्षेप बढ़ता दिखता है जिससे लिके मुस्लिमों की धर्मी स्वतंत्रता घुसाये दे रहै।
- जिसका उल्लेख जल्दी ही एक सुर्य व्यापार में किया कानून के अधीन, द्वारा नियुक्त व्यक्ति को नियुक्त क्रम्भ विभिन्न दलों के साथ की जाएगी.
सरकार का पक्ष -धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं
सरकार का कहना है कि यह कानून किसी भी तरह से धार्मिक स्वतंत्रता से बाधित नहीं होता है, सरकार एक जवाबदेह, पारदर्शी और कुशल संचालन प्रदान करने के लिए भूमिका निभाना चाहती है – जो वक्फ संपत्तियों – न कि धार्मिक मामलों में दखल.
सुधार की आवश्यकता और उद्देश्य
सरकार का तर्क है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में लगातार चुनौतियाँ आ रही थीं ऐसे में व्यवस्थित सुधारों की आवश्यकता थी जिसके चलतेआ वक्फ संशोधन कानून 2025 लाया गया इसमें वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग के लिए समाधन मिलेंगे में इसका कोई समुदाय अधिकारों का उल्ल
निष्कर्ष
अब यह देखना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट इस कानून को कैसे देखता है, माना जा रहा है कि कोर्ट में होने वाली बहस धर्म स्वतंत्रता के अधिकार पर cóर्स होगी और जो फैसला कोर्ट करेगी, वही आगे का रास्ता तय करेगा।
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